सर्दियों में कचरा जलाने से शहरी वायु प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति

पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण

सन्दर्भ

  • एक रिपोर्ट में पाया गया है कि सर्दियों के दौरान खुले में कचरा जलाने की घटनाओं में तेज वृद्धि होती है तथा जलाए जाने वाले कचरे की मात्रा और उससे होने वाला उत्सर्जन गर्मियों की तुलना में तीन गुना तक अधिक होता है।
    • कागज और प्लास्टिक खुले में जलाए जाने वाले कचरे के प्रमुख घटक हैं।

खुले में कचरा जलाने के कारण

  • घर-घर कचरा संग्रहण की अनियमितता और कमजोर नगरपालिका सेवाएँ: जमा हुए कचरे को जलाने के लिए निवासियों को प्रोत्साहित करती हैं।
  • सीमित प्रसंस्करण क्षमता: पर्याप्त पुनर्चक्रण, जैविक खाद बनाने और कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी से कचरा जमा होता रहता है।
  • लागत और सुविधा: जलाना अक्सर घरेलू और व्यावसायिक कचरे के निपटान के एक त्वरित और कम लागत वाले तरीके के रूप में देखा जाता है।
  • सर्दियों में गर्माहट: सर्दियों के दौरान कचरा जलाने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं, क्योंकि कुछ लोग कचरे को आसानी से उपलब्ध गर्मी के स्रोत के रूप में उपयोग करते हैं।
  • नियमों का कमजोर प्रवर्तन: अपर्याप्त निगरानी और दंड के कारण कचरा डंपिंग स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर बार-बार कचरा जलाया जाता है।

कचरा जलाने के प्रभाव

पर्यावरणीय प्रभाव:

  • वायु प्रदूषण: सूक्ष्म कण पदार्थ और विषैले प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है।
  • मृदा और जल प्रदूषण: राख और अवशेष मिट्टी तथा भूजल को प्रदूषित करते हैं।
  • खाद्य-श्रृंखला का प्रदूषण: विषैले पदार्थ पौधों, जानवरों और जलीय जीवों में जमा होते हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान: प्लास्टिक के अवशेष वन्यजीवों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • जलवायु पर प्रभाव: ग्रीनहाउस गैसों और ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन होता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव: 
    • श्वसन संबंधी समस्याएँ: खाँसी, साँस लेने में कठिनाई और जलन का कारण बनता है।
    • हृदय एवं रक्तसंचार संबंधी प्रभाव: हृदय और रक्तसंचार संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ाता है।
    • विषैले पदार्थों का संपर्क: डाइऑक्सिन, भारी धातुएँ और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करते हैं।
    • कैंसर का जोखिम: PAHs सहित कुछ दहन उत्पाद कैंसरकारी होते हैं।

सरकारी पहल

  • CAQM के उपाय: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बार-बार कचरा डाले और जलाए जाने वाले स्थानों को “कचरा-संवेदनशील” स्थल के रूप में चिन्हित किया है तथा ऑपरेशन क्लीन एयर के तहत शून्य-सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाया है।
  • कचरे से ऊर्जा: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) कचरे से ऊर्जा परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जो शहरी, औद्योगिक, कृषि और नगरपालिका कचरे को बायोगैस, बायो-सीएनजी, बिजली तथा उत्पादक गैस/संश्लेषण गैस में परिवर्तित करती हैं।
  • प्रधानमंत्री जी-वन योजना: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एकीकृत जैव-इथेनॉल परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु ‘प्रधानमंत्री जी-वन (जैव ईंधन- पर्यावरण अनुकूल फसल अवशेष निवारण) योजना’ शुरू की है।
  • कानूनी उपाय: सरकार ने ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा, खतरनाक कचरा, ई-कचरा, बैटरी कचरा और जैव-चिकित्सीय कचरे के लिए समर्पित नियम अधिसूचित किए हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
  • बाजार-आधारित विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): उत्पादकों के लिए प्लास्टिक पैकेजिंग, ई-कचरा, बैटरी, टायर और प्रयुक्त तेल से उत्पन्न उपभोक्ता-पश्चात कचरे के प्रबंधन को अनिवार्य करता है। यह पुनर्चक्रण को बढ़ावा देता है, लैंडफिल पर दबाव कम करता है और अनौपचारिक कचरा प्रबंधन से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करता है।
  • 12 एकल-उपयोग प्लास्टिक (SUP) वस्तुओं पर प्रतिबंध: कम उपयोगिता और अधिक कचरा फैलाने की क्षमता वाली वस्तुओं, जैसे प्लास्टिक कटलरी, स्ट्रॉ और थर्मोकोल सजावट आदि पर प्रतिबंध लगाया गया है।

आगे की राह

  • शहरों को प्रतिक्रियात्मक प्रवर्तन से आगे बढ़कर स्रोत-स्तर पर रोकथाम की ओर बढ़ना चाहिए। इसके लिए सार्वभौमिक घर-घर कचरा संग्रहण, विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण और कचरा-संवेदनशील स्थानों की व्यवस्थित निगरानी आवश्यक है।
  • नगरपालिकाओं को शीतकाल के लिए विशेष कचरा-प्रबंधन योजनाओं को वायु प्रदूषण कार्ययोजनाओं के साथ एकीकृत करना चाहिए, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में।
  • स्वच्छता और कचरा-प्रबंधन कर्मियों को सुरक्षित ताप व्यवस्था के विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेहतर कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण प्रणालियों को मजबूत करना, सर्दियों में कचरा जलाने के कारणों और उसके परिणामों—दोनों से निपटने में सहायक हो सकता है।

स्रोत: TH

 

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